हरित विकास के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा: वीर एस. आडवाणी

हरित विकास के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा: वीर एस. आडवाणी

विवेक झा, भोपाल। भारत की विकास यात्रा अब केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसे पर्यावरणीय संतुलन और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के साथ आगे बढ़ाना होगा। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरित और समावेशी विकास को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन एवं ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वीर एस. आडवाणी ने कही।

उन्होंने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक समावेशन और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है।

पश्चिमी भारत को निभानी होगी नेतृत्वकारी भूमिका

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि पश्चिमी भारत लंबे समय से देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। उद्योग, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अग्रणी रहने वाला यह क्षेत्र अब पर्यावरण-अनुकूल और संसाधन-कुशल विकास मॉडल का नेतृत्व भी कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में पश्चिमी भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान भी संभव होगा।

सस्टेनेबिलिटी अब व्यवसायिक आवश्यकता बन चुकी है

आडवाणी ने कहा कि उद्योग जगत में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और संसाधन दक्षता में लगातार बढ़ता निवेश इस बात का प्रमाण है कि सस्टेनेबिलिटी अब केवल कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) तक सीमित नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में वही उद्योग आगे बढ़ पाएंगे जो पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को अपनी व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाएंगे। हरित तकनीकों और ऊर्जा दक्षता में निवेश से उद्योगों की लागत कम होगी और दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।

विकसित भारत-2047 के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी

सीआईआई वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार हो सकता है जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को समान महत्व देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती

वीर एस. आडवाणी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट और प्राकृतिक आपदाएं विकास की गति को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में उद्योगों को हरित भवनों, सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

सीआईआई की पहलें बना रहीं सकारात्मक माहौल

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने में सीआईआई के सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीआईआई-सीईएसडी) तथा इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (सीआईआई-आईजीबीसी) की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं उद्योगों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों, ऊर्जा दक्षता और हरित भवनों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

साझेदारी से ही मिलेगा समाधान

आडवाणी ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकार या उद्योग अकेले नहीं कर सकते। इसके लिए उद्योग, सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।

भविष्य उन्हीं का जो संतुलन साधेंगे

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वही अर्थव्यवस्थाएं और व्यवसाय सबसे अधिक सफल होंगे जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सक्षम होंगे। हरित निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली भविष्य की आर्थिक सफलता की कुंजी साबित होंगे।

वीर एस. आडवाणी की प्रमुख बातें

  • विकसित भारत-2047 के लिए हरित विकास अनिवार्य।
  • आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा।
  • उद्योग, सरकार और समाज की साझेदारी से ही मिलेगा समाधान।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक।
  • हरित भवन और निम्न-कार्बन विकास मॉडल को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • भविष्य में वही उद्योग सफल होंगे जो सस्टेनेबिलिटी को अपनाएंगे।