भोपाल को महिलाओं के लिए समतुल्य महानगर बनाने पर मंथन
विवेक झा, भोपाल। राजधानी के मिंटो हॉल में आयोजित दो दिवसीय तृतीय “भोपाल अंतरराष्ट्रीय महोत्सव एवं परिसंवाद” में भोपाल के भविष्य, महिलाओं की भागीदारी, वैश्विक चुनौतियों और नागरिक-केंद्रित विकास पर गंभीर विमर्श हुआ। “भोपाल इंटरनेशनल सेंटर” द्वारा आयोजित इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, सैन्य विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, सांस्कृतिक हस्तियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2047 तक भोपाल को एक समावेशी, आधुनिक और महिला-अनुकूल महानगर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
फिल्म प्रदर्शन के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ
महोत्सव की शुरुआत पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा निर्मित लघु वृत्तचित्र “माली” के प्रदर्शन से हुई। ग्रामीण पृष्ठभूमि की कबड्डी खिलाड़ी लड़कियों के संघर्ष और उपलब्धियों पर आधारित इस फिल्म ने दर्शकों को प्रेरित किया। इसके बाद आयोजित “मेकर्स ऑफ भोपाल” सत्र में वरिष्ठ चिंतक राजेंद्र कोठारी ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के योगदानों को याद करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में भोपाल ने देश के प्रमुख सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में पहचान बनाई।
नई विश्व व्यवस्था या नई वैश्विक अव्यवस्था?
कार्यक्रम के प्रमुख सत्र “न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” में वैश्विक राजनीति और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। भोपाल इंटरनेशनल सेंटर के संस्थापक शशिधर कपूर ने कहा कि वर्तमान समय को कुछ लोग “न्यू वर्ल्ड डिसऑर्डर” के रूप में भी देख रहे हैं। सत्र की अध्यक्षता कर रहे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.सी. बेहर ने कहा कि दुनिया अभी वास्तविक नई विश्व व्यवस्था तक नहीं पहुंची है, बल्कि पुरानी व्यवस्थाएं नए रूपों में सामने आ रही हैं। उन्होंने राष्ट्र और राज्य की अवधारणाओं के बीच अंतर को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
युद्ध का स्वरूप बदल चुका है : सैन्य विशेषज्ञ
“पोस्ट कोविड विश्वव्यापी युद्धों का दौर : संघर्ष का नया युग” विषय पर आयोजित विशेष सत्र में पूर्व उप-सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मिलन नायडू ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और ग्रे-ज़ोन वारफेयर आज की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गया है। सह-अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया अब हाइब्रिड वारफेयर के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां सैन्य, आर्थिक, तकनीकी और साइबर माध्यमों का संयुक्त उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने भविष्य में चीन से उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों की ओर भी संकेत किया।
महिलाओं की दृष्टि से तैयार हो ‘मेट्रोपॉलिटन भोपाल-2047’
पहले दिन का सबसे चर्चित सत्र “विमेन्स विज़न : मेट्रोपॉलिटन भोपाल 2047” रहा। भोपाल इंटरनेशनल सेंटर की सह-संस्थापक प्रीति त्रिपाठी ने कहा कि भोपाल के भविष्य की योजनाओं में महिलाओं के दृष्टिकोण को समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने भोपाल के महिला शासकों की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर महिला नेतृत्व की समृद्ध परंपरा रखता है।
सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. प्रीति सलूजा ने भोपाल को महिला-केंद्रित शहरी विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना भविष्य के विकास की अनिवार्य शर्त है।
भोपाल की पहचान को संरक्षित रखते हुए हो विकास
दूसरे दिन की शुरुआत “वेटिंग फॉर द किंग्स” नामक वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई, जो विवाह समारोहों में ब्रास बैंड बजाने वाले कलाकारों के जीवन पर आधारित थी।
इसके बाद आयोजित “शेपर्स ऑफ भोपाल” सत्र में वर्ष 2026 के लिए प्रसिद्ध कवि और सांस्कृतिक व्यक्तित्व अशोक वाजपेयी को सम्मानित किया गया। उन्होंने ऑनलाइन संबोधन में भारत भवन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों की स्थापना को भोपाल की आधुनिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया।
‘कमाल का भोपाल’ की परिकल्पना प्रस्तुत
“सिटीजन्स विज़न : मेट्रोपॉलिटन भोपाल 2047” विषय पर आयोजित सत्र में क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने “कमाल का भोपाल” की परिकल्पना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद शहर में कई पांच सितारा होटल विकसित किए जा रहे हैं तथा एआई सिटी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी काम शुरू हो चुका है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) के प्रोफेसर सबरीधरन ने भोपाल को औद्योगिक डिजाइन हब के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। वहीं प्रो. एच.एम. मिश्रा ने नागरिक-केंद्रित नीतियों को शहर के विकास का आधार बनाने पर जोर दिया।
झीलों और पहाड़ियों की पहचान बनी रहे
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) की डॉ. सविता राजे ने कहा कि भोपाल के विकास के साथ उसकी प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “झीलों और पहाड़ियों के शहर” के रूप में भोपाल की पहचान उसकी सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे संरक्षित रखा जाना चाहिए।
डॉ. विनय श्रीवास्तव ने शहर की विभिन्न मेगा परियोजनाओं में नागरिकों की भागीदारी और सुझावों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर व्याख्यान
महोत्सव के अनंतिम सत्र में दिल्ली से प्रोफेसर डॉ. किरण सेठ ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि योग, ध्यान और भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि मानव की रचनात्मकता, मानसिक संतुलन और बौद्धिक विकास के प्रभावी साधन हैं।
सितार वादन से हुआ समापन
दो दिवसीय आयोजन का समापन “शास्त्रीय-पॉप” विषय पर आयोजित विशेष सितार वादन कार्यक्रम से हुआ। प्रसिद्ध कलाकार श्याम वैष्णव ने शास्त्रीय संगीत और लोकप्रिय फिल्मी धुनों का अनूठा संगम प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री उमाकांत गुंदेचा ने की।
7 अगस्त को होगी अंतर-महाविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता
समारोह के दौरान भोपाल इंटरनेशनल सेंटर ने 7 अगस्त को अंतर-महाविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा भी की। आयोजकों ने कहा कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में समसामयिक विषयों पर संवाद और चिंतन की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
परिसंवाद के प्रमुख निष्कर्ष
- भोपाल के विकास में महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता मिले।
- शहर को महिला-अनुकूल और समावेशी महानगर के रूप में विकसित किया जाए।
- नागरिकों के सुझावों को विकास योजनाओं में शामिल किया जाए।
- भोपाल की झीलों, पहाड़ियों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा जाए।
- भविष्य के लिए तकनीक, कौशल विकास और नवाचार आधारित विकास मॉडल अपनाया जाए।