कांगो में इबोला का कहर: 65 मौतें, 246 केस सामने आने से बढ़ी चिंता

May 15, 2026 - 17:02
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कांगो में इबोला का कहर: 65 मौतें, 246 केस सामने आने से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली

एक दूसरे से फैलने वाला खतरनाक इबोला वायरस इन दिनों रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में अपना कहर ढा रहा है। जानकारी के मुताबिक इबोला वायरस से संक्रिमत करीब 65 लोगों की जान चली गई है और 100 से ज्यादा संदिग्धों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अब तक कॉन्गो में इबोला संक्रमण के 246 केस सामने आ चुके हैं। जानकारी के मुताबिक टेस्ट किए गए हर 20 सैंपल में से 13 लोग संक्रमित पाए गए हैं।

बता दें कि 2018 से 2020 के दौरान भी कॉन्गो में इबोला वायरस से बहुत मौतें हुई थीं। उस दौरान करीब 3 हजार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं बूनिया में भी इबोला वायरस से दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में गिना जाता है। इस वायरस से संक्रमित 90 फीसदी लोगों की जान चली जाती है। इससे लोगों को डायरिया और खून बहने जासे लक्ष्ण दिखाई देते हैंय़

तीन दिन में ले लेता है जान
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वायरस केवल तीन ही दिन में किसी की जान ले सकता है। यह वायरस छूने से या आसपास रहने से भी फैल कता है। इसके अलावा छींकने और खांसने से भी पानी के कड़ों के साथ यह वायरस फैल जाता है। इबोला वायरस संक्रामित जीव को खाने से भी हो जाता है।

शरीर पर किसी तरह के घाव या फिर आंख, नाक, मुंह को छूने से यह वायरस संक्रमित कर देता है। इसके बाद बुखार, थकान र सिरदर्द जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। यह ऑर्थोबोलावायरस समूह का ही एक सदस्य है। इस वायरस से संक्रमित होने पर समय पर इलाज ना मिलने पर व्यक्ति की मौत हो जाती है।

क्या हैं लक्षण
इबोला वायरस से संक्रमित व्यक्ति को अत्यधिक थकान, बुखार और सिरदर्द हो जाता है। इसके अलावा उसे नॉजिया. दस्त, रैशेज और खजली जैसी समस्याएं भी होती हैं। अगर इस वायरस से कोई मुक्ति भी पा जाता है तो भी कम से कम दो साल तक इसके लक्षण दिखते रहते हैं। इसके अलावा लोगों मेंसिर दर्द और आखों में जलन की शिकायत बनी रहती है।

हंटा वायरस का भी प्रकोप
हंटा वायरस की चपेट में आए एक क्रूज जहाज के छह यात्री शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, जहां उन्हें कम से कम तीन सप्ताह तक पृथक-वास में रहना होगा। नीदरलैंड से इन्हें लेकर आया 'गल्फस्ट्रीम लॉन्ग-रेंज बिजनेस जेट' पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया राज्य की राजधानी पर्थ के बाहर स्थित 'आरएएएफ बेस पियर्स' पर उतरा। यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को नजदीकी 'बुल्सब्रुक' पृथक-वास केंद्र में स्थानांतरित किया जाना था। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सरकार इस वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए "दुनिया के किसी भी हिस्से की तुलना में सबसे मजबूत पृथक-वास व्यवस्थाओं में से एक" लागू करेगी।

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