महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में अब ऑनलाइन दान, भोग और प्रसाद अर्पित करने का मिलेगा मौका
उज्जैन
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है. अब बाबा के भक्त दुनिया के किसी भी कोने से मंदिर के अन्न क्षेत्र में दान कर सकेंगे. मंदिर समिति पहली बार अन्नदान की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह डिजिटल सेवा संभवतः अगले सोमवार से लागू हो सकती है।
क्या है अन्नक्षेत्र की नई डिजिटल व्यवस्था?
अक्सर लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि पर अन्नदान करना चाहते हैं. शास्त्रों में अन्नदान को ‘महादान’ कहा गया है. पहले इसके लिए भक्तों को मंदिर आकर रसीद कटवानी पड़ती थी. लेकिन, अब मंदिर समिति ने इसे डिजिटल बना दिया है. अब भक्त महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी विशेष दिन को बुक कर सकेंगे. वहां निर्धारित सहायता राशि जमा करके अन्नदान का पुण्य लाभ लिया जा सकता है।
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, मंदिर का विशाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह से जन-सहयोग और दान पर टिका है। इस नई डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और दूर-दराज के भक्त भी सेवा कार्य से जुड़ सकेंगे।
सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था
मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन दान की यह नई व्यवस्था आगामी सोमवार से विधिवत शुरू हो जाएगी।
श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट
http://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाकर "Donation" सेक्शन के माध्यम से आसानी से राशि जमा कर सकते हैं।
अन्नक्षेत्र: प्रतिदिन 10,000 श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी
महाकाल मंदिर का अन्नक्षेत्र अपनी सेवा और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यहाँ:
प्रतिदिन दो शिफ्ट में भोजन प्रसादी का वितरण होता है।
रोजाना लगभग 10,000 श्रद्धालु नि:शुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं।
पहले केवल ऑफलाइन (मंदिर पहुंचकर) दान की सुविधा होने के कारण कई इच्छुक भक्त इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते थे।
भोजन प्रसादी और दान राशि
सेवा का प्रकार निर्धारित दान राशि
दोनों समय के भोजन के लिए ₹1,10,000
एक समय के भोजन के लिए ₹51,000
मीठे प्रसाद (मिठाई) के लिए ₹21,000
साल भर पहले से कर सकेंगे एडवांस बुकिंग
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब श्रद्धालु पूरे वर्ष में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम (Advance) बुकिंग कर सकेंगे। लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या परिजनों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर पहले से ही भोजन प्रसादी सुरक्षित कर सकते हैं।
भगवान को स्वयं लगा सकेंगे भोग
डिजिटल दान करने वाले भक्तों के लिए मंदिर समिति ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव की भी योजना बनाई है। दानदाताओं को भोग आरती के समय मंदिर में आमंत्रित किया जाएगा और उनके स्वयं के हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
प्रतिदिन लगता है विशेष भोग
बाबा महाकाल को प्रतिदिन सुबह 10 बजे विशेष भोग लगाया जाता है। इसमें शुद्ध घी की रोटियां, दाल-चावल और दो प्रकार की मौसमी सब्जियां शामिल होती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मिठाई भी अर्पित करते हैं। भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही अन्नक्षेत्र में आम श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी शुरू की जाती है।
बाबा को भोग लगाने का विशेष अवसर
इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘भोग’ से जुड़ी है. सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि ऑनलाइन दान करने वाले भक्तों को बाबा महाकाल को भोग अर्पित करने का अवसर मिलेगा. दानदाता अपने परिवार के साथ मंदिर आ सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी उन्हें बाबा महाकाल के पास लेकर जाएंगे. वहां भक्त अपने हाथों से बाबा को भोग लगा सकेंगे और इस अनूठी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
दान से चलता अन्न क्षेत्र
सिम्मी यादव ने बताया, महाकाल मंदिर का अन्न क्षेत्र पूरी तरह से दानदाताओं के सहयोग से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन व्यवस्था रोजाना दो अलग-अलग शिफ्ट में चलती है. सहायक प्रशासक के अनुसार, अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवा कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह नवाचार किया गया है. जो भक्त किन्हीं कारणों से उज्जैन नहीं आ पाते हैं, वे अब घर बैठे ही अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे. यह डिजिटल माध्यम उनके खास पलों को और भी यादगार बनाएगा।